शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ ब्रह्मसूत्रधराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपयज्ञोपवीत धारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो पवित्र ब्रह्मसूत्र (जनेऊ) को सदा धारण करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संस्कार शुद्धि
विस्तृत लाभ
संस्कार शुद्धि
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्।
ॐ सागरोत्तारकाय नमः
ज्मह्रीं (Jmhrīm)
ॐ अमृतोद्भवायै नमः
ॐ यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपः। छन्दोभ्योऽध्यमृतात्सम्बभूव। स मेन्द्रो मेधया स्पृणोतु। अमृतस्य देव धारणो भूयासम्॥
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥