बुद्धिं देहि यशो देहि
बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे। मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे देवी! मुझे बुद्धि दें, यश दें, कवित्व दें। मेरी मूर्खता को हर लें और मेरी रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
पूर्ण मूर्खता और जड़ता का हरण, कवित्व शक्ति का वरदान
विस्तृत लाभ
पूर्ण मूर्खता और जड़ता का हरण, कवित्व शक्ति का वरदान।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला कुँअरि लईं हँकारि कै॥
ॐ सनातनाय नमः
ॐ सुमङ्गल्यै नमः
ॐ महाचन्द्राय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ शाश्वताय नमः