शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गिरिजात्मज मंत्र
ॐ गिरिजात्मजाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअष्टविनायक मूल मंत्र
स्वरूपगिरिजात्मज (लेण्याद्रि)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
गिरिजात्मज (गिरिजा के पुत्र) को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पारिवारिक संबंधों में मिठास, वात्सल्य और सकारात्मकता
विस्तृत लाभ
पारिवारिक संबंधों में मिठास, वात्सल्य और सकारात्मकता।
जप काल
लेण्याद्रि पीठ का स्मरण करते हुए।
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भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।
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ॐ शास्त्रे नमः
ॐ महात्रिपुरसुन्दर्यै नमः
ॐ भर्गाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।