शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
मङ्गल चण्डिका स्तोत्र मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवि मङ्गलचण्डिके ऐं क्रूं फट् स्वाहा॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारएकविंशत्यक्षर (21 अक्षरों वाला) मंत्र |
स्वरूपमंगल चण्डिका
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
इसे कल्पतरु माना गया है
02
विष्णु और ब्रह्मा ने भी अभीष्ट सिद्धियों हेतु इसका जप किया था 56
03
मंगल दोष शांति हेतु विशेष फलदायी
विस्तृत लाभ
इसे कल्पतरु माना गया है। विष्णु और ब्रह्मा ने भी अभीष्ट सिद्धियों हेतु इसका जप किया था 56। मंगल दोष शांति हेतु विशेष फलदायी।
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