शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ इन्दुमुख्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो चंद्रमा (इन्दु) के समान शीतल मुख वाली हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्वभाव में शीतलता और सौम्यता
विस्तृत लाभ
स्वभाव में शीतलता और सौम्यता।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
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ॐ भकाररूपाय नमः
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
महेन्द्रे वै गिरिश्रेष्ठे रामं नित्यम् उपासते। ऋषयो वेदविदुषो गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥
ब्रह्मासि रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥