नृसिंह मंत्र
ॐ कुमतिघ्न्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मनुष्य की सभी बुरी प्रवृत्तियों और कुबुद्धि का नाश करने वाली।
इस मंत्र से क्या होगा?
कुविचारों, बुरी प्रवृत्तियों और दुर्व्यसनों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
कुविचारों, बुरी प्रवृत्तियों और दुर्व्यसनों से मुक्ति।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मृत्युघ्न्यै नमः
ॐ बलिने नमः
ॐ अतीन्द्राय नमः
ॐ सेतुकृते नमः
ॐ विशालाक्ष्यै नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।