शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ मध्यं पातु हिरण्याक्ष-वक्षःकुक्षिविदारणः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमध्य भाग (पेट) / उग्र स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हिरण्याक्ष (व हिरण्यकशिपु) का वक्ष फाड़ने वाले मेरे मध्य भाग की रक्षा करें। (उदर रोगों से मुक्ति)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वजनेश्वर्यै नमः
वियदीकारसंयुक्तं वीतिहोत्रसमन्वितम्। अर्धेन्दुलसितं देव्या बीजं सर्वार्थसाधकम्॥
ॐ कामविमोहनाय नमः
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥
ॐ महामोहायै नमः
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।