शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ महर्षये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपमहान ऋषि
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो एक महान अवतार होने के साथ-साथ एक श्रेष्ठ महर्षि भी हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्रज्ञा
विस्तृत लाभ
प्रज्ञा
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शरणत्राणतत्पराय नमः
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
ॐ उद्भूतायै नमः
ॐ वासुदेवाय नमः
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ज्ञात्वा शिवं शान्तिमत्यन्तमेति