शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ नित्यगतायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सर्वत्र (नित्य) व्याप्त और गमन करने वाली हैं, उन्हें नमन 18।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥
ॐ घोरविक्रमाय नमः
ॐ कृष्णप्राणाधिदेव्यै नमः
ॐ राक्षसामरगन्धर्वकोटिकोट्यभिवन्दिताय नमः
ॐ वरसिद्धिविनायकाय नमः
न मृत्युर्न शंका न मे जातिभेदः... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥