शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ सर्वलोकचारिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपलोक-विचरक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
तीनों लोकों में अबाध रूप से विचरण करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शोकनाशिन्यै नमः
ॐ दुर्गतोद्धारिण्यै नमः
पाशाङ्कुशापूप कुठारदन्तं चञ्चत्करकॢप्त वराङ्गुलीयकम् । पीतप्रभं कल्पतरोरधस्थं भजामि नृत्तोपपदं गणेशम् ॥
ॐ नाभिं मे पातु नरहरिः स्वनाभिब्रह्मसंस्तुतः
ॐ शर्वाय नमः
ऊर्ध्वे महाकाल भैरवाय नमः ऊर्ध्वे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।