शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सुब्रह्मण्य बीजात्मक मूल मंत्र
ॐ सौं शरवणभवाय स्वाहा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसुब्रह्मण्य / षण्मुख
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
'सौं' (पराशक्ति बीज) से युक्त, शरवण में जन्मे भगवान को मैं अपना सर्वस्व आहुत करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शत्रु-विजय, अकाल मृत्यु निवारण
विस्तृत लाभ
शत्रु-विजय, अकाल मृत्यु निवारण।
जप काल
स्कंद षष्ठी पर लाल वस्त्र धारण कर अनुष्ठान।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पाशाङ्कुशापूप कपित्थजम्बू फलं तिलान् वेणुमपि स्वहस्तैः । धृतः सदासौ तरुणः अरुणाभः पायात्सयुष्मान् तरुणो गणेशः ॥
ॐ ह्रीं बटुकाय मम प्रत्यक्ष दर्शय दर्शय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
ॐ सर्वस्मै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विज्ञानात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ विभवे नमः