शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं आद्य लक्ष्म्यै नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपआदि लक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ब्रह्मांड की आदि कारण रूपा देवी आदि-लक्ष्मी को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्मिक शांति, जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष प्रदायनी)
विस्तृत लाभ
आत्मिक शांति, जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष प्रदायनी) 12।
जप काल
ध्यान मुद्रा में अभय-वरद मुद्रा का चिंतन करते हुए।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वमन्त्रस्वरूपवते नमः
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ ईशान्यां पातु भद्रो मे सर्वमंगलदायकः
जाज्वल्यमानं सुरवृन्दवन्द्यं कुमारधारातटमन्दिरस्थम् । कन्दर्परूपं कमनीयगात्रं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ अकिञ्चनवरप्रदायै नमः
ॐ श्रीं महा कालिकायै नमः