शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ शुचये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपरम पवित्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
परम शुद्ध, सात्विक और पवित्रता के प्रतीक भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कविजिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहा मां वारुणेऽवतु। (अर्थ: कवियों की जिह्वा में बसने वाली देवी पश्चिम में रक्षा करें) 8
ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं लाट भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।
ॐ हुं हुं शत्रुस्तम्भनाय हुं हुं ॐ फट्
ॐ दुर्दर्शाय नमः
ॐ कपर्दीशकृपान्वितायै नमः
श्री राम जय राम कोदण्ड राम