शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपभागवत-प्रतिपाद्य
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शुकदेव जी की वाणी रूपी अमृत-सागर के चन्द्रमा को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाक्-सिद्धि एवं विद्या
विस्तृत लाभ
वाक्-सिद्धि एवं विद्या
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ॐ चक्रधराय नमः
ॐ अशेषगुणसम्पन्नायै नमः
वागीशा यस्य वदने लक्ष्मीर्यस्य च वक्षसि। यस्यास्ते हृदये संवित् तं नृसिंहमहं भजे॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्वादिनी मम जिह्वाग्रे सरस्वती स्वाहा।
वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥
ॐ क्षेत्रदाय नमः।