ॐ तत्सत् भूर्भुवः स्वः तस्मै परब्रह्मणे नमः
ॐ तत्सत् भूर्भुवः स्वः तस्मै परब्रह्मणे नमः (गोपाल-तापनी में विभिन्न वर्णनों के साथ प्रयुक्त)
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ॐ तत्सत् (वह सत्य है), जो भूर्भुवः स्वः (तीनों लोकों) में व्याप्त है, उस परब्रह्म (कृष्ण) को नमस्कार है 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मन्त्र साधक को यह बोध कराता है कि बाल-गोपाल ही साक्षात् परब्रह्म और ब्रह्माण्ड के रचयिता हैं
इससे तत्त्व-ज्ञान की प्राप्ति होती है
विस्तृत लाभ
यह मन्त्र साधक को यह बोध कराता है कि बाल-गोपाल ही साक्षात् परब्रह्म और ब्रह्माण्ड के रचयिता हैं। इससे तत्त्व-ज्ञान की प्राप्ति होती है 1।
जप काल
वेदान्त साधना और ध्यान के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आत्मनः शक्तिमुद्वीक्ष्य मानोत्साहौ तु यो व्रजेत्। शत्रूनेकोऽपि हन्याच्च क्षत्रियान् भार्गवो यथा॥
ॐ जिष्णवे नमः
ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं ह्रुं ह्रीं स्वाहा॥
मङ्गलम् भगवान विष्णुः मङ्गलम् गरुणध्वजः
राम कथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी॥
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8