शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ विनिद्रायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविनिद्रा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
निद्रा रहित
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आलस्य और तन्द्रा का नाश, सजगता में वृद्धि
विस्तृत लाभ
आलस्य और तन्द्रा का नाश, सजगता में वृद्धि
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
ॐ ऐं ऐं मनो वाञ्छित सिद्धये ऐं ऐं ॐ
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये प्रणवार्धमात्रा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः
ॐ स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे नमः
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोद्धृतधरो वराहः