विश्व की सर्वांगीण रक्षा हेतु
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र से क्या होगा?
सुकृतियों के यहाँ लक्ष्मी और पापियों के यहाँ अलक्ष्मी रूप देवी से विश्व की रक्षा की प्रार्थना
विस्तृत लाभ
सुकृतियों के यहाँ लक्ष्मी और पापियों के यहाँ अलक्ष्मी रूप देवी से विश्व की रक्षा की प्रार्थना।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा॥
ॐ वरप्रदायै नमः
ॐ वकारमकरारूढाय नमः
ॐ ह्रीं राधिकायै नमः
कल्हारांबुज बीजपूरक गदा दन्तेक्षु बाणैः सदा बिभ्राणो मणिकुम्भ शालिकलशौ पाशं च चक्रान्वितम् । गौराङ्ग्या रुचिराविन्दकरया देव्या सदा संयुतः शोणाङ्कुश शुभमातनोतु भजतामुद्दण्डविघ्नेश्वरः ॥
ॐ ह्रीं बटुकाय मम मनोवांछित कार्य सिद्धिं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।