अघोर मंत्र (दक्षिण मुख)
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो अघोरघोरेतरेभ्यः। सर्वतः शर्वः सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्र रूपेभ्यः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे शिव! आपके जो अघोर (शांत) रूप हैं, जो घोर (भयंकर) रूप हैं, और जो इन दोनों से परे हैं, उन सभी रुद्र रूपों को मेरा सर्वत्र नमन है 7।
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर शक्तियों का शमन, भय मुक्ति, तांत्रिक बाधाओं से रक्षा, और मूलाधार चक्र की ऊर्जा का शोधन
विस्तृत लाभ
घोर शक्तियों का शमन, भय मुक्ति, तांत्रिक बाधाओं से रक्षा, और मूलाधार चक्र की ऊर्जा का शोधन 7।
जप काल
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके 35।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वपुण्यायै नमः
कल्हारांबुज बीजपूरक गदा दन्तेक्षु बाणैः सदा बिभ्राणो मणिकुम्भ शालिकलशौ पाशं च चक्रान्वितम् । गौराङ्ग्या रुचिराविन्दकरया देव्या सदा संयुतः शोणाङ्कुश शुभमातनोतु भजतामुद्दण्डविघ्नेश्वरः ॥
ॐ रसाय नमः
ॐ शङ्कुकर्णमहाकर्णप्रमुखाद्यभिवन्दिताय नमः
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला कुँअरि लईं हँकारि कै॥
ॐ महोग्रः पूर्वतः पातु महावीराग्रजोऽग्नितः