शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
चतुरक्षर वाग्भव कमला
ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
'ऐं' (सरस्वती), 'श्रीं' (लक्ष्मी), 'ह्रीं' (माया), 'क्लीं' (काम) शक्तियों को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाक्-सिद्धि, ज्ञान के साथ अपार ऐश्वर्य
विस्तृत लाभ
वाक्-सिद्धि, ज्ञान के साथ अपार ऐश्वर्य।
जप काल
वसंत पंचमी पर सरस्वती-लक्ष्मी संयुक्त कृपा हेतु।
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ॐ वाणीश्वर्यै नमः
धृत पाशाङ्कुश कल्पलता स्वरदश्च बीजपूरयुतः । शशिशकल कलितमौली त्रिलोचनोऽरुणश्च गजवदनः ॥ भासुरभूषण दीप्तो बृहदुदर पद्म विष्टरोल्लसितः । विघ्नपयोधरपवनः करधृत कमलः सदास्तु भूत्यै ॥
ॐ वायुपुत्राय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये पञ्चमहाभूतानि तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
शान्तिकर्मणि सर्वत्र तथा दुःस्वप्नदर्शने। ग्रहपीडासु चोग्रासु माहात्म्यं शृणुयान्मम॥ 17
ॐ ऊरू मनोभवः पातु जानुनी नररूपधृक्