शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ असुरान्तक चक्राय स्वाहा – कवचाय हुं
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकवच-न्यास / असुरान्तक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
असुरों का अंत करने वाले चक्र को स्वाहा, वे मेरा कवच बनें। (बाह्य आक्रमणों से अभेद्य सुरक्षा)।
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ॐ भगवते नमः
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोद्धृतधरो वराहः
ॐ सुमुखाय नमः
ॐ नमो भगवते संहार भैरवाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म राक्षसान् उच्चाटय उच्चाटय संहारय संहारय सर्व भय छेदनं कुरु कुरु स्वाहा।
कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥