शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ दुर्गमार्थस्वरूपिण्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो जीवन के अत्यंत गूढ़ और दुर्गम अर्थों का साक्षात् स्वरूप हैं।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं ऐं ईं नं लं सौं स र व ण भ व
ॐ कर्पूरामृतपायिन्यै नमः
पक्वचूत फलकल्प मञ्जरीमिक्षुदण्ड तिलमोदकैः सह । उद्वहन् परशु हस्त ते नमः श्रीसमृद्धिपतये देव पिङ्गल ॥
सिकताश्च मे वनस्पतयश्च मे हिरण्यं च मेऽयश्च मे...
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सूर्यः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ हृदयं विजया तथा।