शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ कालरात्रि ध्यान मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारध्यान मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
एक जटा वाली, जपाकुसुम के फूलों को कानों में धारण करने वाली, गर्दभ पर सवार, भयंकर स्वरूप वाली माँ कालरात्रि शत्रुओं का भक्षण करें 17।
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