परशुराम मंत्र
ॐ लङ्किनीभञ्जनाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
लंका की द्वारपाल राक्षसी लंकिनी का मान मर्दन करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥
क्षरं प्रधानममृताक्षरं हरः क्षरात्मानावीशते देव एकः। तस्याभिध्यानाद्योजनात्तत्त्वभावाद् भूयश्चान्ते विश्वमायानिवृत्तिः॥
ॐ कपालमालिने नमः।
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृंगं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृंगम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥
ॐ दुर्गमच्छेदिन्यै नमः
जो शांत भाव से सह्याद्रि (और महेंद्र) पर्वत पर निवास करते हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: जीवन में स्थिरता और भूमि-लाभ) 19।