शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
नमो नमस्तुभ्यम् असह्यवेग-शक्तित्रयायाखिल-धीगुणाय
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारगजेन्द्र मोक्ष (इंद्रिय-निग्रह मंत्र)
स्वरूपत्रिशक्ति-नियंता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं उन भगवान को नमन करता हूँ जिनकी त्रिविध शक्ति अत्यंत तीव्र है और जो शरणागतों की अजेय रक्षा करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
तीनों गुणों (सत्त्व, रज, तम) पर विजय और अनियंत्रित इंद्रियों पर अंकुश
विस्तृत लाभ
तीनों गुणों (सत्त्व, रज, तम) पर विजय और अनियंत्रित इंद्रियों पर अंकुश 58।
जप काल
ध्यान और वैराग्य प्राप्ति हेतु एकांत में।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सूर्यज्योतिषे नमः
ॐ गोपीकरावलाम्बिने नमः
ईशानः सर्वविद्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपतिर्ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम्॥
ॐ सत्यायै नमः
एकदन्तं महाकायं तप्तकाञ्चनसन्निभम् । लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देऽहं गणनायकम् ॥
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥