शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ परंज्योतिषे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपज्योति स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो समस्त ब्रह्मांड को प्रकाशित करने वाली ब्रह्म-ज्योति के स्रोत हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आंतरिक अज्ञान रूपी अंधकार का नाश
02
सत्य के प्रकाश और ज्ञान की अनुभूति
विस्तृत लाभ
आंतरिक अज्ञान रूपी अंधकार का नाश; सत्य के प्रकाश और ज्ञान की अनुभूति।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दिव्याद्वृन्दारण्यकल्पद्रुमाधः श्रीमद्रत्नागारसिंहासनस्थौ। श्रीश्रीराधाश्रीलगोविन्ददेवौ प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि॥
पाशाङ्कुश स्वदन्त आम्र फलवान् आखुवाहनः । विघ्नान् निहन्तु नः शोणः सृष्टिदक्षो विनायकः ॥
असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः। उतैनं गोपा अदृशन्नदृशन्नुदहार्यः। उतैनं विश्वा भूतानि स दृष्टो मृडयाति नः॥
ॐ अपरायै नमः
ॐ मन्त्रगध्यायै नमः
ॐ नागहाराय नमः।