शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ सागरोत्तारकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसमुद्र-लांघक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
100 योजन के महासागर को एक छलांग में पार करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ तुलस्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।
ॐ पद्मनाभाय नमः
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥
द्विषड्भुजं द्वादशदिव्यनेत्रं त्रयीतनुं शूलमसिं दधानम् । शेषावतारं कमनीयरूपं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ करुणामय्यै नमः
आग्नेये रूरु भैरवाय नमः आग्नेये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।