शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ सर्वराजगृहेस्थितायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी राजाओं के महलों में राज्यलक्ष्मी के रूप में स्थित हैं, उन्हें नमन 14।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गुह्यं मे पातु गुह्यानां मन्त्राणां गुह्यरूपधृक्
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ अधरं गोपिका पातु।
ॐ दुर्गतोद्धारिण्यै नमः
ॐ वरप्रभवे नमः
ॐ काशीश्वरकृतामोदायै नमः