ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र

शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारश्लोक 4
स्वरूपशरजन्मा
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

शरवन में जन्मे, गणेश के पूर्वज, मुक्ति-मार्ग प्रशस्त करने वाले, सभी आगमों के प्रणेता।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

शास्त्रों का ज्ञान व इच्छाओं की पूर्ति

विस्तृत लाभ

शास्त्रों का ज्ञान व इच्छाओं की पूर्ति।

जप काल

नित्य संध्याकाल।

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