राधा तांत्रिक महाबीज मूल मंत्र (विस्तृत)
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं रां श्रीं ॐ राधायै स्वाहा ॐ
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
श्रीं (लक्ष्मी/ऐश्वर्य), ह्रीं (भुवनेश्वरी/ह्लादिनी), क्लीं (काम/आकर्षण), और रां (राधा बीज) बीजों सहित परमतत्त्व श्री राधा को पूर्ण आहुति एवं नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
अपार सौंदर्य, तीव्र आकर्षण, प्रबल प्रेम-भक्ति, और तांत्रिक इष्ट-सिद्धि की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अपार सौंदर्य, तीव्र आकर्षण, प्रबल प्रेम-भक्ति, और तांत्रिक इष्ट-सिद्धि की प्राप्ति 32।
जप काल
अत्यंत गोपनीय; योग्य गुरु से दीक्षा के उपरांत रात्रिकाल में विशिष्ट तांत्रिक साधना के दौरान।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दक्षिणे चंड भैरवाय नमः दक्षिणे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ ऐं श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा दक्षिणे मां सदाऽवतु। (अर्थ: ज्ञानियों की माता दक्षिण दिशा में रक्षा करें) 8
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः। अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः॥
ॐ गहनाय नमः
ॐ शरपञ्जरभेदकाय नमः
ॐ गुह्यं मे पातु गुह्यानां मन्त्राणां गुह्यरूपधृक्