शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ सिंहिकाप्राणभञ्जनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसिंहिका-नाशक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
आकाश में उड़ते हुए छाया पकड़ने वाली राक्षसी सिंहिका का वध करने वाले।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ तपस्विने नमः
गुरु गृह गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥
यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवैः वेदैः साङ्गपदक्रमोपनिषदैः गायन्ति यं सामगाः । ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो यस्यान्तं न विदुः सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः ॥
ॐ जितमित्राय नमः।
ॐ द्विषड्भुजाय नमः
ॐ आदिशक्त्यै नमः