शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ विश्वमूर्तये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारविशिष्ट सहस्रनाम-मंत्र (Specific Sahasranama Mantras)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका शरीर ही यह ब्रह्मांड है (विराट स्वरूप)।
जप काल
रुद्राक्ष माला से मंगलवार का उपवास रखते हुए अभीष्ट सिद्धि हेतु।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वामप्रियाय नमः
जो महर्षि भृगु के पवित्र वंश को आनंदित करने वाले हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: कुल-गोत्र की वृद्धि) 19।
क्रीं क्रीं ह्रीं चण्ड भैरवाय नमः।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवीलक्ष्मीः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ दुर्गदारिण्यै नमः
ॐ अग्नाविष्णू सजोषसेमा वर्धन्तु वां गिरः। द्युम्नैर्वाजेभिरागतम्॥