शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कल्याणकारी भवानी मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं भगवति भवानि देवि स्वाहा॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारशाक्त तांत्रिक मंत्र
स्वरूपभवानी / मूल प्रकृति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ज्ञान, माया और काम बीज से युक्त हे भगवती भवानी! मैं आपके निमित्त यह आहुति (स्वाहा) समर्पित करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पंचतत्वों पर नियंत्रण, सर्व-सुख की प्राप्ति और आध्यात्मिक जागरण
विस्तृत लाभ
पंचतत्वों पर नियंत्रण, सर्व-सुख की प्राप्ति और आध्यात्मिक जागरण 12।
जप काल
संध्या काल में लाल आसन पर बैठकर जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ उदाराङ्गायै नमः
ॐ त्रिलोकपालाय नमः।
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पश्चिम मुखे। गरुडाय सकल विष हरणाय स्वाहा॥
ॐ जृम्भाय नमः
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
ॐ परमेश्वराय नमः