शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
अशोकवृक्षवल्लरीवितानमण्डपस्थिते प्रवालबालपल्लवप्रभारुणाङ्घ्रिकोमले। वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपसम्पदा-आलये (संपत्ति की अधिष्ठात्री)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अशोक के वृक्षों से बने मंडप में विराजमान, मूंगे जैसी लाल आभा वाले कोमल चरणों वाली हे देवी, कृपा दृष्टि कब करेंगी?
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
लाभ: अभय और सम्पदा की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
लाभ: अभय और सम्पदा की प्राप्ति।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
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