शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ अव्यक्ताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपनिराकार स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो इन्द्रियों से अगोचर और अव्यक्त हैं, उन्हें नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
निर्गुण उपासना
विस्तृत लाभ
निर्गुण उपासना
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वल्लभावल्लभाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये साक्षान्मृत्युः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
जो महर्षि भृगु के पवित्र वंश को आनंदित करने वाले हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: कुल-गोत्र की वृद्धि) 19।
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ दैत्यदानवभञ्जनाय नमः
नमो वञ्चते परिवञ्चते स्तायूनां पतये नमः।