शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ चञ्चलद्वालसन्नद्धलम्बमानशिखोज्ज्वलाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपूंछ-धारक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
चंचल और लटकती हुई लंबी, उज्वल पूंछ से सुशोभित भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अनघाय नमः
शङ्खेषु चाप कुसुमेषु कुठार पाश चक्राङ्कुशौ कलममञ्जरिका गदाद्यौ । पाणिस्थितैः परिसमाहित भूषणः श्री विघ्नेश्वरो विजयते तपनीयगौरः ॥
ॐ कलनादनिनादिन्यै नमः
ॐ शचीमाङ्गल्यरक्षकाय नमः
जो भक्तों के हृदय में रमण करने वाले भगवान राम (भार्गव राम) हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: आंतरिक शांति) 19।
ॐ स्वर्णाकर्षणशीलाय नमः।