शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ दशबाहवे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदश-भुजाधारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
दस भुजाओं वाले विराट तांत्रिक स्वरूप को धारण करने वाले भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं ह्रुं ह्रीं स्वाहा॥
ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्। (स्वरूप: सरस्वती | लाभ: कानों, श्रवण-शक्ति व नाद-ग्रहण की रक्षा | अर्थ: सरस्वती मेरे कानों की निरंतर रक्षा करें) 8
ॐ श्रीं ह्रीं जय लक्ष्मी प्रियाय नित्य प्रमुदित चेतसे लक्ष्मी स्रितार्थ देहाय श्रीं ह्रीं नमः
ॐ किशोरानन्ददायिन्यै नमः
ॐ कीलिकायै नमः
ॐ रक्तश्यामगळाय नमः