शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ दुर्गमेश्वर्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी दुर्गम सत्ताओं और ब्रह्मांड की ईश्वरी हैं।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महाज्वालाय नमः
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
ॐ रामभक्ताय नमः
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्। गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥
ॐ अन्नपूर्णायै नमः
ॐ कस्तूरीतिलकोज्ज्वलायै नमः