पाप-शमन स्तुति
दुष्टं क्षत्रं भुवो भारमब्रह्मण्यमनीनशत्। तस्य नामानि पुण्यानि वच्मि ते पुरुषर्षभ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने पृथ्वी के भार-स्वरूप और ब्राह्मण-विरोधी दुष्ट क्षत्रियों का नाश किया, हे पुरुषश्रेष्ठ! मैं उन भगवान परशुराम के परम पुण्यदायी नामों का वर्णन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
पुण्यों का उदय और पाप-कर्मों का क्षय
विस्तृत लाभ
पुण्यों का उदय और पाप-कर्मों का क्षय।
जप काल
भगवान के अवतार-कथा श्रवण के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वज्रदंष्ट्राय नमः
ॐ वैष्णव्यै नमः
ॐ विक्रान्तायै नमः
तडित्सुवर्णचम्पकप्रदीप्तगौरविग्रहे मुखप्रभापरास्तकोटिशारदेन्दुमण्डले। विचित्रचित्रसञ्चरच्चकोरशावलोचने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ शतायुष्यप्रदात्रे नमः
काली कराली च मनोजवा च सुलोहिता या च सुधूम्रवर्णा। स्फुलिङ्गिनी विश्वरुची च देवी लेलायमाना इति सप्त जिह्वाः॥