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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

तांत्रिक महामृत्युंजय मंत्र (मृतसंजीवनी विद्या)

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारतांत्रिक रक्षा / मारण-निवारण मंत्र
स्वरूपअमृतेश भैरव / मृत्युंजय
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

(वैदिक मंत्र के अर्थ के साथ) बीज मंत्रों (हौं, जूं, सः) और व्याहृतियों द्वारा ब्रह्मांडीय ऊर्जा का शिव रूप में आवाहन कर प्राणों की रक्षा का आह्वाहन।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

घोर संकट, महामारी, असाध्य रोगों और मृत्यु-तुल्य कष्टों से तत्काल रक्षा तथा कवच का निर्माण

विस्तृत लाभ

घोर संकट, महामारी, असाध्य रोगों और मृत्यु-तुल्य कष्टों से तत्काल रक्षा तथा कवच का निर्माण 6।

जप काल

रात्रिकाल, विशेष अनुष्ठान या महा रुद्राभिषेक में योग्य ब्राह्मणों द्वारा संपूट लगाकर जप।

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