ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

जयन्ती मङ्गला काली

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारस्तोत्र-मंत्र / सर्व-कल्याणकारी
स्वरूपकाली-दुर्गा
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

सर्वत्र विजय शालिनी, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा... रूपों में आप ही प्रतिष्ठित हैं; हे देवी, आपको नमस्कार है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

समस्त पापों का नाश, विजय और कल्याण

विस्तृत लाभ

समस्त पापों का नाश, विजय और कल्याण।

जप काल

किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में।

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्। जयावहं जपेन्नित्यमक्षय्यं परमं शिवम्॥

ॐ महोदराय नमः

ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।

दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥

ॐ शर्वरीप्रियकारकाय नमः

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्॥