शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ कण्ठं मे पातु नृहरिर्भूभृदनन्तकोटनः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकण्ठ (गला) / नृहरि
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
संपूर्ण पृथ्वी को धारण करने वाले नृहरि मेरे कण्ठ की रक्षा करें। (श्वास व स्वर दोषों का निवारण)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नमो भगवते उग्र भैरवाय सर्वविघ्ननाशाय ठः ठः स्वाहा।
वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः कालाय नमः कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमो बलाय नमो बलप्रमथनाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः॥
ॐ महाकायाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अष्टदिक्पालाः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ तपोरूपाय विद्महे ब्रह्मचारिणे धीमहि तन्नो वामनः प्रचोदयात्।
ॐ जयिने नमः