शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम अष्टकम् (श्लोक 7)
मार्गणाशोषिताभ्ध्यंशं पावनं चिरजीवनम्। य एतानि जपेन्द्रामनामानि स कृती भवेत्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपसमुद्र-शोषक (कोंकण-निर्माता), चिरंजीवी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने अपने तीक्ष्ण बाणों (मार्गण) से समुद्र के जल को सोख लिया (पीछे धकेल कर भूमि प्रकट की), जो परम पावन और चिरंजीवी हैं। जो कोई भी भार्गव राम के इन नामों का जप करता है, वह कृतार्थ (सफल) हो जाता है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परम पवित्रता, जीवन में चिरंजीवी ऊर्जा का संचार और समस्त कार्यों में पूर्ण सफलता
विस्तृत लाभ
परम पवित्रता, जीवन में चिरंजीवी ऊर्जा का संचार और समस्त कार्यों में पूर्ण सफलता।
जप काल
अष्टक पाठ के अंत में फलश्रुति के रूप में।
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