शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ नाभिं मे पातु नरहरिः स्वनाभिब्रह्मसंस्तुतः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनाभि / स्रष्टा स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी नाभि से उत्पन्न ब्रह्मा उनकी स्तुति करते हैं, वे नरहरि मेरी नाभि की रक्षा करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महात्मने नमः
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
ॐ गुल्फौ गोपालवल्लभा पातु।
ॐ शतायुष्यप्रदात्रे नमः
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायुः ॥