शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
नारायण एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारउपनिषदिक ध्यान मंत्र
स्वरूपविराट नारायण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कुछ भी अतीत में था, वर्तमान में है, और भविष्य में होगा, वह सब केवल नारायण ही हैं; उनके अतिरिक्त कुछ नहीं है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अद्वैत ज्ञान की प्राप्ति और मृत्यु-भय से मुक्ति
विस्तृत लाभ
अद्वैत ज्ञान की प्राप्ति और मृत्यु-भय से मुक्ति 2।
जप काल
वेदांत चिंतन या ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान के समय।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मायायै नमः
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ओङ्कारः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कंसप्रध्वंसकारिणे नमः
ॐ भक्तनिधये नमः
ॐ बहुनेत्राय नमः।