पद्मासने शब्दरूपे मन्त्र
ॐ पद्मासने शब्दरूपे ऐं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
कमल पर विराजमान, शब्द-स्वरूपा, हे वाग्वादिनी, मेरे मुख से प्रवाहित हों।
इस मंत्र से क्या होगा?
उत्तम भाषण कला, वाद-विवाद प्रतियोगिता में विजय और शब्दों पर जादुई अधिकार
विस्तृत लाभ
उत्तम भाषण कला, वाद-विवाद प्रतियोगिता में विजय और शब्दों पर जादुई अधिकार।
जप काल
भाषण या शास्त्रार्थ मंच पर जाने से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आवत हियँ हरषीं नहिं नैनन्हि नहिं सनेह। तुलसी तहाँ न जाइये कंचन बरसे मेह॥
जो सर्वव्यापक भगवान विष्णु के ही साक्षात् अवतार हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: सर्व-कल्याण) 19।
स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथा मढे चिन्तामणिस्थेवर । लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥
ॐ अग्निजन्मने नमः
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
ॐ वागीश्वराय विद्महे हयग्रीवाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात्।