शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ सहस्राक्षाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविराट स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी हजारों आँखें हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्रभु की सतत निगरानी
02
साधक कभी भी स्वयं को अकेला या असहाय महसूस नहीं करता
विस्तृत लाभ
प्रभु की सतत निगरानी; साधक कभी भी स्वयं को अकेला या असहाय महसूस नहीं करता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥
ॐ महाडम्भाय नमः
ॐ ह्रीं बटुकाय मम तंत्र बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये चन्द्रः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
अग्रतश्चतुरो वेदान् पृष्ठतः सशरं धनुः। उभाभ्यां च समर्थोऽहं शापादपि शरादपि॥
ॐ विश्वतोमुखाय नमः