ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्री राधा मंत्र

समागच्छ महालक्ष्मि! धन्यधान्यसमन्विते! प्रसीद पुरतः स्थित्वा प्रणतं मां विलोकय॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारलक्ष्मी हृदय स्तोत्र (श्लोक 15)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे धन-धान्य समन्विता महालक्ष्मी! आएं, प्रसन्न हों और मेरे सामने खड़ी होकर मुझ प्रणत (झुके हुए) को देखें 14।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

देवी की प्रत्यक्ष कृपा दृष्टि

विस्तृत लाभ

देवी की प्रत्यक्ष कृपा दृष्टि।

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