शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ श्रीहरिप्रियायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्री हरि विष्णु को सर्वाधिक प्रिय देवी को नमन।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वलोकरिमर्दनाय नमः
यस्य त्वेतानि चत्वारि वानरेन्द्र यथा तव। धृतिर्दृष्टिर्मतिर्दाक्ष्यं स कर्मसु न सीदति॥
ॐ अग्रगामिने नमः
ॐ पार्वतीप्रियनन्दनाय नमः
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
प्रणवः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ मे पञ्चवक्त्रकः