शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभवब्रह्मेन्द्रगङ्गाधरां, त्वां त्रैलोक्यकुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारत्रैलोक्य कुटुंबिनी मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके एक मंद कटाक्ष (कृपा-दृष्टि) से ब्रह्मा, इन्द्र और शिव वैभव प्राप्त करते हैं, उन त्रैलोक्य को अपना कुटुंब मानने वाली, कमल पर विराजने वाली मुकुंद-प्रिया की मैं वंदना करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ऐश्वर्य की अनुभूति
विस्तृत लाभ
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ऐश्वर्य की अनुभूति।
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