शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शुभ-लाभ मंत्र
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवशीकरण मंत्र
स्वरूपलक्ष्मी विनायक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ॐ श्रीं गं, हे सौम्य गणपति, आप वरदान देने वाले हैं, संपूर्ण जनमानस (व्यापारिक दृष्टिकोण से) को मेरे अनुकूल करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सुख, धन-संपत्ति और सौभाग्य की अबाध प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सुख, धन-संपत्ति और सौभाग्य की अबाध प्राप्ति।
जप काल
व्यापार या नए व्यवसाय के शुभारंभ पर।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥
ॐ दुर्गमध्यानभासिन्यै नमः
ॐ रसिकाय नमः
ॐ कच्छपेशाय विद्महे महाकूर्माय धीमहि तन्नो कूर्मः प्रचोदयात्।
ॐ महाप्रलयकारणाय नमः।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवीसरस्वती तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः